अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट अपने पूरे वित्तीय ढांचे का पुनर्गठन करने जा रहा है। इसके तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था समाप्त कर ट्रस्ट के खातों को किसी अन्य सरकारी या निजी बैंक में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अब चढ़ावे की गिनती, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह पेशेवर प्रणाली के तहत संचालित करना चाहता है। इसके लिए स्थायी चार्टर्ड अकाउंटेंट, मैनेजमेंट ग्रेजुएट, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और अनुभवी बैंक कर्मचारियों की नियुक्ति की योजना बनाई जा रही है।
बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गणना और बैंकिंग कार्यों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जाएगी। इसके बजाय यह जिम्मेदारी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी में कराई जाएगी, ताकि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस संबंध में अंतिम फैसला 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में लिया जा सकता है।
इधर, चढ़ावा चोरी मामले में एसबीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस जांच में बैंक के कुछ कर्मचारियों की कथित लापरवाही और मिलीभगत सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू की गई है। हालांकि अब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट और एसबीआई के बीच दान राशि की गणना और बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर लिखित समझौता था। बावजूद इसके, कथित गड़बड़ियों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। सूत्रों का कहना है कि एसबीआई के उच्च अधिकारियों ने अयोध्या धाम शाखा के प्रबंधक समेत 8 से 10 कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन फिलहाल जांच जारी है और कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं, एसबीआई प्रबंधन ने इस मामले में केवल इतना कहा है कि वह विशेष जांच दल (SIT) की जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। मामले पर बैंक अधिकारियों ने इससे अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में पूरे प्रकरण को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।
