बारिश का मौसम आते ही मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। इसके साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए कई लोग कॉइल और लिक्विड रिपेलेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनसे निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में कुछ आसान और प्राकृतिक घरेलू उपाय अपनाकर भी मच्छरों को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है।
नीम और कपूर का मिश्रण
नीम के तेल में प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखने वाले गुण पाए जाते हैं। इसमें थोड़ा कपूर मिलाकर शाम के समय दीया या डिफ्यूजर में इस्तेमाल करने से इसकी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है। यह तरीका रासायनिक रिपेलेंट की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
नींबू और लौंग का उपाय
एक नींबू को आधा काटकर उसमें 8–10 लौंग लगा दें और इसे कमरे के कोनों या खिड़कियों के पास रख दें। नींबू और लौंग की तेज खुशबू मच्छरों को दूर रखने में सहायक मानी जाती है। यह उपाय बिना धुएं के इस्तेमाल किया जा सकता है।
लहसुन के पानी का स्प्रे
लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबाल लें। ठंडा होने के बाद इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर घर के अंधेरे कोनों, बालकनी या उन जगहों पर छिड़कें जहां मच्छर अधिक आते हैं। लहसुन की तीखी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।
इन सावधानियों का भी रखें ध्यान
- घर, छत, कूलर, गमलों और अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
- सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर और पानी के बर्तनों की सफाई करें।
- शाम के समय खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें या मच्छरदानी/जाली का इस्तेमाल करें।
- बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं ताकि मच्छरों के काटने का खतरा कम हो।
- रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
ध्यान रखें
घरेलू उपाय मच्छरों को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें डेंगू या मलेरिया से बचाव का पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध विकल्प नहीं माना जाता। सबसे प्रभावी बचाव है कि मच्छरों को पनपने से रोका जाए और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुझाए गए सुरक्षित मच्छररोधी उपाय अपनाए जाएं। यदि तेज बुखार, शरीर में दर्द या डेंगू-मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
